Mehnat ki kamai माधवपुर नाम का एक छोटा गांव था। वहाँ एक मोतीलाल नाम का सेठ रहता था। उसका एक बेटा था जिसका नाम गोपाल था। वह बहुत हि आलसी और कामचोर था , वह दिन भर इधर उधर आवारा लड़को के साथ भटकता रहता था। और घर से पैसे लेकर व्यर्थ की चीज़ो मे बर्बाद कर देता था, इससे सेठ मोतीलाल बहुत चिंतित रहते थे की न जाने क्या होगा इसका भविष्य पैसों के मोल को समझता नहीं है, पढाई लिखाई छोड़ दिया और कुछ काम भी नहीं करता है। एक दिन गोपाल और गांव के एक लड़के के बिच लड़ाई हो गयी और उस लड़के के माता-पिता उसके घर शिकायत करने आ गए । इससे सेठ को बहुत गुस्सा आया और उसने गोपाल को घर से निकाल दिया और कहा दिन भर आवारागर्दी करते हो और अब झगड़े भी करने लगे। निकल जाओ घर से और कुछ कमाके लाओ नहीं तो खाने को नहीं मिलेगा। गोपाल वहाँ से चला गया और एक बगीचे मे जाकर बैठकर सोचने लगा, कि क्या किया जाए पिताजी तो बहुत गुस्से में हैं। कुछ देर बाद वह अपनी माँ के पास गया और कहा - माँ मुझे अभी के लिए कुछ पैसे देदो मैं काम करके तुम्हें पैसे दे दूँगा...