TOTE KI BANDHAN(तोते की बंधन ) एकबार की बात है , एक गांव में एक व्यापारी रहता था। उसके पास एक तोता था जो एक पिंजरे में बंद था। व्यापारी के घर मे हर महीने पूजा होता था और जो पंडित जी पूजा करने आता था, वह उस तोते से बहुत परेशान रहता था। पंडित जी जब भी कथा के अंत में यह कहता की " हरी का नाम लो तो बंधन छूटे " तो तोता उस समय कहता पंडित जी झूठे है। इस तरह पंडित जी हर बार पूजा करने आता और तोता उन्हें झूठा कहता। तंग आकर एक दिन पंडित जी अपने गुरु के पास गया और कहा गुरूजी में एक व्यापारी के घर पूजा करने जाता हूँ, वहां एक तोता है जो मेरा अपमान करते रहता है, में जब भी कहता हूँ " हरी नाम लो तो बंधन छूटे " वह तोता मुझे झूठा कहने लगता है। गुरूजी ने कहा - उस तोते के पास ले चलो मुझे। गीता पढ़ रहे एक आदमी की सच्ची घटना वह दोनों तोते के पास पंहुचे और उस तोते से गुरूजी ने पूछा क्यों तोते महाराज तुम्हे ये पंडित झूठा क्यों लगता है? तोता अपनी कहानी बताने लगा। तोते ने कहा - गुरूजी में एकबार उड़ता-उड़ता एक आश्रम के पास पंहुचा और एक पेड़ पर ज...