SAVE EARTH - THE HUMAN'S FUTURE STORY(धरती बचाओ - मनुष्य की भविष्य की कहानी)
SAVE EARTH
प्रारंभ

विशाल ब्रम्हांड के एक छोटे से कोने में एक आकाशगंगा में हाइड्रोजन और हीलियम गैसों से मिलकर कई तारों का जन्म होता है।
उन तारों के उत्पति के समय बचे हुए गैसों से गैस पिंड का निर्माण होता है। वे सारे गैस पिंड ठंडा होकर धीरे धीरे ग्रहो का रूप लेता है। इस प्रकार इस ब्रम्हांड में अनेको तारों और ग्रहों का जन्म हुआ। उनमें से एक अनोखा तारा जिसके चारों और कई ग्रहो में एक अद्भुत ग्रह बनता है। जो धीरे- धीरे ठंडा होता है और बहुत ही सुंदर नीले रंग का दिखाई पड़ता है।




वर्तमान
अब शुरू होता है, मध्यांतर युग। अब इंसान अपनी आबादी बढ़ाने पर जोर देने लगे हैं, क्योंकि इनका धर्म संकट में है। इंसान जंगलो का सफाया करने लगे है, और बड़ी -बड़ी इमारते, नई कल कारखाने बना रहे है और साथ में गन्दगी भी फैला रहे है।नई टेक्नोलॉजी ला रहे है। मोबाइल ,कंप्यूटर, कित्रिम उपग्रह, क्या दिमाग लगाई है, लेकिन जब प्रदूषण को रोकने की बात आती है, तो इनका दिमाग बंद हो जाता है। जानवर और पक्षी तो पता नहीं कैसे लुप्त होते जा रहे है। इसमें इंसान का नाम ही नहीं आ रहा है। कुछ पक्षी कीड़े-मकोड़े और मरे हुए जानवर को खाकर सफाई में हमारी मदद करते है।


इंसान इस दुनिया की सब जीवो मे श्रेष्ठ है। लेकिन अपने स्वार्थ के कारण ये किसी की परवाह नहीं कर रहे है। यह विनाश की और लगातार बढ़ रहे है। हमारी पृथ्वी खतरे में हैं, दिन के दिन प्लास्टिक का उपयोग हो रहा है, जो हमारी मिट्टी हवा और जल तीनो को बर्बाद कर रही है। नदियां, समुद्र और जंगल हर जगह प्रदूषण फैला हुआ है। आप कहीं भी जाइये आपको कुछ मिले या न मिले लेकिन प्लास्टिक की चीज़े पड़ी हुई जरुर मिलेगी। लेकिन फिर भी इसपर कोई रोक नहीं है। इंसान दिखावे मे चल रहा हे। इन्हें जुट और कपडे के बने थैला ले जाने में शर्म आती है। लेकिन ये प्लास्टिक का प्रयोग करेंगे, ये इनके व्यक्तित्व को शोभा देती है। सभी को ऑक्सिजन चाहिए लेकिन ये पेड़ नहीं लगा सकते है। सभी को साफ रहना पसंद है, लेकिन ये सफाई नहीं करना चाहते हैं। कोई अगर इन सब के विरूद्ध खड़ा हो जाये, तो उनका साथ देने के बजाय उन्हें भी ये कहकर दबा देंगे की तेरे अकेले से क्या होगा तू बदलेगा देश।
अब आती है धर्म की बात। हर धर्म का ठेकेदार बैठा हुआ है जिसे ईश्वर क्या है स्वयं पता नहीं लेकिन उनको बांटकर लगे हुए है लड़ाने में। ईश्वर शांति और प्रेम चाहता है। धर्म की किताबों में एकता और शांति की बात है लेकिन इंसान उन किताबो को पढ़ने की जगह किसी और से सुनना ज्यादा पसंद करते है। और अगर पढ़ाने वाला सही पढ़ा रहा है, तो इतनी नफरत कहाँ से आयी।
सभी जीवों की रचना ईश्वर ने की है, तो इंसान को बनाने वाला अलग ईश्वर कैसे हो सकता है। इस पृथ्वी पर हर जिव एक दूसरे पर निर्भर है। मनुष्य पेड़-पौधों, जल, हवा और जानवरों पर निर्भर है। उसी तरह जानवर, पेड़-पौधो इंसान पर निर्भर है। और इंसानो का यह फर्ज़ बनता है की वह इन सब की परवाह करे तभी इस धरती की संतुलन बनी रहेगी। आपस में धर्म के नाम पर लड़कर क्या कर लोगे। किसको बचाने में लगे हुए हो जिसको बचाना चाहते हो क्या वो तुम्हारे लिए पेड़ लगाएंगे, क्या वो तुम्हारी गन्दगी साफ करेंगे। हम इंसान सच जानते हुए भी इनसे मुह फेरे हुए है। ओर ये सब जो भी कर रहा है सब पैसे के लिए ही कर रहा है। ऊपर बैठा बुद्धिमान इंसान शतरंज की खेल में मोहरों के जैसा हमारा इस्तेमाल कर रहे है। ओर हम अपना दिमाग बंद करके जो हुकुम मेरे आका कहके उनके इशारे पर चल रहे गलत सही का फर्क भूलने लगे है।
भविष्य
अगर इंसान अब तक नहीं समझा तो भविष्य कुछ इस प्रकार होगा -


उपाय
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गौतम बुद्ध ने कहा है , हजार खोखले शब्द से वह एक शब्द अच्छा है जो शांति लाये।
save water,save animal, save earth and save human.
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आगे पढ़े ....GAUTAM BUDDHA KI KAHANI
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