DO ACHHI KAHANI ACHHAI KI - दो अच्छी कहानी अच्छाई की
DO ACHHI KAHANI ACHHAI KI - दो अच्छी कहानी अच्छाई की
यह पढ़कर उस आदमी से रहा नहीं गया और वह उस पते पर जाने लगा। जब वह उस पते पर पहुंचा और आवाज लगाया तो देखा एक बूढी औरत लाठी के सहारे बाहर आयी। उसे मालूम हुआ की वो अकेली रहती है और उसे ठीक से दिखाई नहीं देता।
उस आदमी ने कहा : "माँ जी, आपका खोया हुआ 50 रुपये मुझे मिला है और में उसे देने आया हूँ।" यह सुन वह बूढी औरत रोने लगी और कहा : " बेटा, अभी तक 30-40 लोग 50-50 रुपया दे चुके है। में पढ़ी-लिखी नहीं हूँ। ठीक से दिखाई भी नहीं देता। पता नहीं कौन मेरी इस हालत पर तरस खाकर मदद करने के उद्देश्य से लिख गया है। "
उस आदमी के बहुत कहने पर माँ जी ने पैसे रख तो लिए परन्तु विनती की : " बेटा, वह मेने नहीं लिखा है। किसी ने मेरी हालत पर दया करके लिखा होगा। जाते-जाते उसे फाड़कर फेंक देना "
वह आदमी हाँ कहकर वहां से चला गया। पर जाते-जाते उसके अंतरात्मा ने उसे सोचने पर मजबूर कर दिया की उन 30-40 लोगो से भी "माँ जी" ने यही कहा होगा। किसी ने भी उस कागज को नहीं फाड़ा। जिंदगी में हम कितने सही और गलत है, यह सिर्फ दो ही शख्स जानते है। - परमात्मा और हमारी अंतरात्मा !
उसका हृदय उस व्यक्ति के प्रति कृतज्ञता से भर गया। जिसने इस वृद्धा की सेवा का उपाय ढूंढा। सहायता के बहुत से मार्ग है , पर इस तरह की सेवा उसके ह्रदय को छू गयी और उसने भी उस कागज को नहीं फाड़ा।
शिक्षा : मदद करने की कई तरीके है। बस कर्म करने की तीव्र इच्छा मन में होनी चाहिए।
वह आदमी हाँ कहकर वहां से चला गया। पर जाते-जाते उसके अंतरात्मा ने उसे सोचने पर मजबूर कर दिया की उन 30-40 लोगो से भी "माँ जी" ने यही कहा होगा। किसी ने भी उस कागज को नहीं फाड़ा। जिंदगी में हम कितने सही और गलत है, यह सिर्फ दो ही शख्स जानते है। - परमात्मा और हमारी अंतरात्मा !
उसका हृदय उस व्यक्ति के प्रति कृतज्ञता से भर गया। जिसने इस वृद्धा की सेवा का उपाय ढूंढा। सहायता के बहुत से मार्ग है , पर इस तरह की सेवा उसके ह्रदय को छू गयी और उसने भी उस कागज को नहीं फाड़ा।
शिक्षा : मदद करने की कई तरीके है। बस कर्म करने की तीव्र इच्छा मन में होनी चाहिए।
दूसरी कहानी
एकबार एक छोटा बच्चा अपनी माँ से किसी बात से गुस्सा होकर बाहर जाने लगा। माँ ने उसे रोका लेकिन वह नहीं रुक रहा था और चिल्ला कर कह रहा था। " में तुमसे नफरत करता हूँ " उसकी माँ ने कहा रुक जाओ बेटे माफ कर दो। वह फिर से चिल्लाया " नहीं रुकूंगा में तुमसे नफरत करता हूँ " उसकी माँ उसके पीछे-पीछे गयी।
वह एक घाटी के किनारे बैठ गया। उसकी माँ फिर से उसे बुलायी - " मेरे अच्छे बेटे चलो घर "
उसने जोर से चिल्लाया " में तुमसे नफरत करता हूँ "
और घाटी से गूंज की आवाज आयी " में तुमसे नफरत करता हूँ " वह घबरा गया और दौड़ के अपने माँ के पास चला गया क्योंकि पहली बार उसने गूंज का आवाज सुना था।
माँ से कहा - यह कौन था माँ जिसने मुझे ऐसा कहा ? माँ ने जवाब दिया " घबराओ मत बेटे "
वह अच्छा आदमी है जो तुम कहोगे वह भी तुम्हे वही कहेगा। जाओ जाकर कहो " में तुमसे प्यार करता हूँ "
उसने ऐसा ही किया। और वापस गूंज आया में तुमसे प्यार करता हूँ।
शिक्षा : इससे उस बच्चे को सिख मिला की जो हम दुसरो को देते है वही हमें वापस मिलता है
इसलिए दोस्तों दुसरो की भलाई करेंगे तो आपके साथ भी भला होगा।
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