वो गिराएंगें बार बार तू उठकर फिर से चलता चल – wo girayenge baar baar tu uthkar fir se chal

वो गिराएंगें बार बार तू उठकर फिर से चलता चल kavita – wo girayenge baar baar tu uthkar fir se chal

मेरी सूनी हुई Best motivational कविता में से एक 

ठोकरें अपना काम करेंगी
तू अपना काम करता चल
वो गिराएंगें बार-बार
तू उठकर फिर से चलता चल

हर वक्त, एक ही रफ्तार से
दौड़ना कतई जरुरी नहीं तुम्हारा
मौसम की प्रतिकूलता हो
तो बेशक थोड़ा सा ठहरता चल

अपने से भरोसा न हटे
बस ये ध्यान रहे तुम्हें सदा
नकारात्मक ख्याल दूर रहे तुझसे
उनसे थोड़ा संभलता चल

पसीने की पूंजी लूटाकर
दिन रात मंजिल की राह में
दिल के ख़्वाबों को
जमीनी हकीकत में बदलता चल

एक दिन में नहीं लगते
किसी भी पेड़ पर फल कभी भी
पड़ाव दर पड़ाव ही सही
अपनी मंजिल की ओर सरकता चल। – अंजान मित्र 


वो गिराएंगें बार बार तू उठकर फिर से चलता चल – wo girayenge baar baar tu uthkar fir se chal


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Hindi poem by India motivation
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